तीन तलाक को राजनीति से बाहर रखें, मुस्लिमों से मोदी ने की अपील

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नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी ने मुस्लिम समाज से तीन तलाक के मुद्दे का हल निकालने के लिये कहा है, मोदी ने कहा है कि मैं मुस्लिम समाज के लोगों से भी आग्रह करूंगा कि इस मसले को राजनीति के दायरे में मत जाने दीजिये, मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध लोग आगे आयेंगे, मुस्लिमा बेटियों के साथ गुजर रही है उसके खिलाफ लड़ाई  लड़ेंगे तो रास्ता निकलेगा। मोदी ने यह बात शनिवार को 12 वीं सदी के समाज सुधारक बासव के जयंती समारोह में कहीं। 

अन्याय के खिलाफ लड़े थे राजा राममोहन राय 

मोदी ने महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय का जिक्र करते हुए कहाए  राय ने जब विधवा विवाह खत्म करने की बात रखी होगीए उस समय उन्हें कितनी आलोचना का शिकार होना पड़ा होगा। वह माता.बहनों के साथ समाज में हो रहे घोर अन्याय के खिलाफ लड़े और करके दिखाया। तीन तलाक को लेकर आज इतनी बहस चल रही है। भारत की महान परंपरा को देखते हुए मेरे भीतर एक आशा का संचार हो रहा है। मेरे मन में एक आशा जगती है कि इस देश में समाज के भीतर से ही लोग निकलते हैंए जो बुरी परंपराओं को तोड़ते हैं और आधुनिक परंपराओं को विकसित करते हैं।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने क्या कहा था

16 अप्रैल को ट्रिपल तलाक पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी)  ने कहा कि अगर ट्रिपल तलाक का गलत इस्तेमाल किया गया,  तो ऐसा करने वालों का सोशल बायकॉट किया जाएगा। एआईएमपीएलबी की दो दिन की मीटिंग के बाद मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने ये जानकारी दी थी।  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के मसले पर 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच सुनवाई कर रही है। एआईएमपीएलबी ने कहा कि ट्रिपल तलाक को लेकर काफी गलतफहमियां हैं, इस पर बोर्ड कोड ऑफ कंडक्ट जारी करेगा। बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना वलीम रहमानी ने कहाए पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि तीन तलाक औरत को मुश्किलों से बचाने के लिए है। हम दूसरे मजहब में दखल नहीं करते हैं, तो दूसरा मजहब भी हमारे मामले में दखल ना दे। तलाक का मामला शरीयत के हिसाब से ही रहेगा। जब कोर्ट का फैसला आएगा, तब हम उसे देखेंगे। ट्रिपल तलाक मामले में अगर कोड ऑफ़ कंडक्ट को फॉलो नहीं किया गया है या शरिया में बताए गए कारणों के अलावा यदि कोई अन्य बहाने से तीन तलाक देता है,  तो उसका सोशल बायकॉट किया जाएगा। एआईएमपीएलबी सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी ने कहा,  जब पुरुष गुस्से में, नशे में या फिर बिना तलाक की नीयत से एक साथ 3 बार तलाक बोल देता है,  तो शरियत के हिसाब से उसे गुनाह माना जाता है। लेकिनए इस तरह से दिए गए तलाक को भी मान लिया जाता है।

तीन तलाक पर सरकार का क्या मानना है

केन्द्र सरकार ने पिछले वर्ष 7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहू विवाह का विरोध किया था साथ ही जेंडर इक्वैलिटी और सेक्युरिजम के आधार पर मामले पर फिर से विचार करने की अपील की थी लेकिन इस मामले में मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाय किया गया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भारत में जारी तीन तलाक निकाह, हलाला और बहू विवाह का इस्लाम में रिवाज नहीं है तीन बार तलाक कहना महिलाओं की प्रतिष्ठा के खिलाफ है सच तो यह है कि कई मुस्लिम देशों में इस बारे में बड़े सुधार किये जा चुके हैं । देश की कॉन्स्टिट्यूशनल हिस्ट्री में पहली बार सरकार ने महिला पुरूष में बराबरी और सेकुलरिज्म के आधार पर इन पर फिर से विचार करने की अपील की थी। 

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