कैसे माने की मोदी और ट्रम्प की मुलाकात बेहतर रही, एच1 बी वीजा पर नहीं हुई चर्चा और न ही ठोस वादा किया आतंकवाद पर ट्रम्प ने

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नई दिल्ली. पीएम मोदी और ट्रम्प की पहली मुलाकात में काफी गर्मजोशी दिखाई दी, पाक, आतंकवाद, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का जिक्र तो हुआ ही, अनुमान से इतर डी कंपनी यानी दाऊद इब्राहिम का भी नाम आया और दोनों नेताओं की मुलाकात से कुछ देर पहले ही अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने हिजबुल मुजाहिद््दीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया। मोदी-ट्रम्प के मुलाकात के आसपास जो कुछ हुआ। 

इसके मायने क्या है-विदेश मामलों के जानकारी रहीस से जाने  

भारत को अमेरिका ने रीजनल पॉवर से ऊपर रखा

दोनों नेताओं की मुलाकात को दो अलग अलग नजरिये से देखा जाना चाहिये, प्रोटोकॉल के नजरिये से देखें तो यह काफी अच्छी मुलाकात रहीं, व्हाइट हाउस के बाहर मोदी को रिसीव करने स्वयं ट्रम्प पत्नी मेलानिया के साथ आये, ट्रम्प की गर्मजोशी दिखाती है कि उन्होंने भारत को एक रीजनल पॉवर से उपर रखा। जैसा कि 20 जून को पेंटागन की ओर से जारी रिपोर्ट में भी कहा गया था कि अमेरिका को भारत की रीजनल नही ंग्लोबल पॉवर मानना चाहिये। दूसरे नजरिये से देखें तो यह मुलाकात कोई ठोस नतीजा नहीं दे पायी। आतंकवाद से लेकर बिजनेस तक कोई बड़ा वादा नहीं किया गया ।

अमेरिका ने सलाहुद्दीन को आतंकी घोषित किया 

हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करना भारत के लिए कामयाबी तो है, लेकिन बेहद छोटी। सलाहुद्दीन पाकिस्तान और उसकी ओर से फैलाए जा रहे आतंकवाद का एक बहुत छोटा सा हिस्साभर है। कामयाबी तब कही जाएगी,  जब अमेरिका पाकिस्तान और उसकी ओर से पाले जा रहे आतंकवाद का कंप्रेहेंसिव ;समग्रद्ध खात्मे का विश्वास दिलाए।

ट्रम्प भारत के साथ रक्षा संबंध ठीक इच्छुक दिखाई दिये

मोदी के दौरे से ठीक पहले भारत को 22 गार्जियन ड्रोन की खरीदी को मंजूरी दी गई। हाल ही में अमेरिका के एफ.16 फाइटर प्लेन भारत में बनाने के लिए एग्रिमेंट भी साइन हुआ। यह साबित करता है कि ट्रम्प भारत के साथ डिफेंस रिलेशन बेहतर बनाए रखने में इंट्रेस्टेड हैं। वैसे भी अमेरिका में व्हाइट हाउस से वहां का डिफेंस हेडक्वार्टर पेंटागन ज्यादा पावरफुल है। अमेरिका की इकोनॉमी डिफेंस बिजनेस पर ही ज्यादा डिपेंड है। अमेरिका यह जानता है कि भारत उसके लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। फिर भी हमें इसे डिफेंस रिलेशन में एक पोटेंशियल की तरह देखना चाहिए।

एच1 बी वीजा पर नहीं हुई चर्चा 

मोदी.ट्रम्प की मुलाकात में एच.1बी वीजा का मुद्दा नहीं उठा। हालांकिए दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से इसे बेहद अहम माना जा रहा था।  इस बारे में पूछे जाने पर फॉरेन सेक्रेटरी एसण् जयशंकर ने रिपोर्टर्स से कहा कि एच.1बी वीजा के मुद्दे पर बिजनेस लीडर्स के साथ काफी चर्चा हुई। मोदी और ट्रम्प ने डिजिटल साझेदारी के बारे में बातचीत की।  उन्होंने कहा, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों में भारतीय.अमेरिकी कम्युनिटी की बड़ी भूमिका को स्वीकार किया है। जब आप किसी चीज को अहमियत देते हैंए तो जाहिर है आप उसका ध्यान रखते हैं। बता दें कि ट्रम्प ने एच.1बी वीजा से जुड़े नियमों को कड़ा करने और उसका गलत इस्तेमाल रोकने के लिए अप्रैल में एक्जिक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए थे।

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