गुड एंड सिम्पल टैक्स है जीएसटीः मोदी, अर्द्ध रात्रि से एक देश’एक देश टैक्स लागू

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नई दिल्ली. 17 वर्ष की कोशिशों के अंततः गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) देशभर में लांच हो गया पीएम नरेन्द्र मोदी और प्रणव मुखर्जी ने बटन दबाकर जीएसटीको लांच किया, एक देश एक टैक्स सिस्टम की शुरूआत संसद के स्पेशल सेशन से की गयी जो शुक्रवार की आधी रात को बुलाया गया। जीएसटीकी लांचिंग से कांग्रेस के बायकॉट के चलते पूर्व पीएम मनमोहन सिंह संसद नहीं पहुंचे। लेकिन मोदी ने इस टैक्स रिफॉर्म का क्रेडिट सभी दलों को दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी किसी एक दल की उपलब्धि नहीं है यह सांझी विरासत है। यह भी संयोेग है कि गीता के 18 अध्याय थे और जीएसटी केलिये भी उसकी काउंसिल की 18 बैठकें हुई, जीएसटी गुड एं सिंपल टैक्स है, वहीं, प्रणव मुखर्जी ने कहा कि वर्षो पहले शुरू हुए लम्बे सफर के पूरा होने का यह ऐतिहासिक अवसर है आपको बता दें कि आजाद भारत के इतिहास में यह चौथा मौका रहा जब सेंट्रल हॉल में मिडनाइट सेशन बुलाया गया, इससे पहले भी तीनों मौकों पर आधी रात को संसद बुलाई गयी  थी, लेकिन वह आजादी के जश्न के लिये थी। 70 वर्ष में पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी टैक्स रिफॉर्म के लिये आधी रात को संसद सत्र चला हो। 

नए चश्मे में आंखें एडजस्ट करनी पड़ती हैं

सभी सरकारों ने प्रयत्न किए लेकिन आजादी के 70 वर्ष बाद भी हम गरीबों तक संसाधन नहीं पहुंचा पाए। अगर हम संसाधनों को सुव्यवस्थित ढंग से पहुंचाएं तो गरीबी दूर होगी। कभी.कभी आशंकाएं होती हैं कि कुछ भी नहीं होगा। हर किसी को टेक्नोलॉजी नहीं आती। हर परिवार में अगर 10वीं.12वीं का विद्यार्थी है तो उसे सब आता है। वह भी छोटे व्यापारी की मदद कर सकता है। कृपा करके आशंकाएं मत कीजिए। आप पुराने डॉक्टर से लगातार आंख चेक करवाते हों। वही आपका नंबर निकालता हो। चश्मा भी एक ही व्यक्ति से ही बनवाते हों और नया चश्मा आता हो तो एकाध दिन आंख ऊपर.नीचे एडजस्ट करनी पड़ती है।

जीएसटी पर बेस्ट ब्रेन्स ऑफ द कंट्री ने काम किया

संविधान का मंथन 2 साल 11 महीने और 17 दिन तक चला था। हिंदुस्तान के कोने.कोने से विद्वान उसमें हिस्सा लेते थे। विवाद होते थे। राजी.नाराजगी होती थी। सब मिलकर बहस करते थे। रास्ते खोजते थे। कभी इस पारए,  उस पार नहीं जा पाए तो बीच रास्ते पर चलने का प्रयास करते थे। ठीक उसी तरह से ये जीएसटी भी एक लंबी विचार प्रक्रिया परिणाम थे। सालों तक चर्चा होती रही। संसद में इसके पहले के भी सांसदों ने लगातार इस पर बहस की है। एक प्रकार से बेस्ट ब्रेन्स ऑफ द कंट्री ने लगातार यह काम किया है। उसी का नतीजा है कि आज इस जीएसटी को हम साकार रूप में देख सकते हैं।

प्रणव मुखर्जी जी बोले 

प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता (मैच्यूरिटी) और समझदारी के लिए जीएसटी एक उपहार है। ये भारत के एक्सपोर्ट को ज्यादा कॉम्पेटेटिव बनाएगा और घरेलू इंडस्ट्री को उनके स्तर पर बढ़ने और इम्पोर्ट के लिए कम्पटीशन का मौका देगा। देश की आर्थिक क्षमता,  कर अनुकूलताए,  घरेलू और विदेशी इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने में जीएसटी बड़ा रोल निभाएगा। ये भी गौर करने लायक बात है कि जीएसटी काउंसिल की 18 बैठकें हुईं और उनमें सारे फैसले आम सहमति से लिए गए। ये मेरे लिए निजी खुशी का मौका है।

जीएसटी का बटन दबाकर किया लांच

रात 11.00 बजे से कार्यक्रम शुरू हुआ, अरूण जेटली, नरेन्द्र मोदी और फिर प्रणव मुखर्जी ने भाषण दिया इसके बाद 12 बजते ही पीएम नरेन्द्र मोदी और प्रणव मुखर्जी ने बटना दबाकर जीएसटी को लांच किया । पीएम ने इसे गुड एंड सिम्पल टैक्स । जीएसटी की लांचिंग क्लिप में भी यही लाइन हाईलाइट कीगयी । इवेंट में सुमित्रा महाजन, वाइस प्रेसीडेंट हामिद अंसारी, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा, अमित शाह, नितिन गड़करी, और सुषमा स्वराज और दूसरे सीनियर लीडर्स सहित एमपी उपस्थित थे। 

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