एयरइंडिया को बेचने के लिये केन्द्र सरकार का ब्र्रेकअप प्लान, टुकड़ों में हो सकती बिक्री

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नई दिल्ली.  कर्ज में डूबी एयरइंडिया को बेने के लिये भारत सरकार ब्रेकअप प्लान पर विचार कर रही है, इसके तहत खरीददारों को अट्रैक्ट करने के लिये एयरइंडिया को पार्टो में बेचा जा सकता है। इस एयरलाईन्स के घाटे को ध्यान में रखते हुए सरकार यह फैसला भी ले सकती है। 

अगले माह से शुरू हो प्रॉसेस 

न्यूज एजेंसी रायटर के मुताबिक,  इस मामले से जुड़े अफसरों ने कहा है कि एअर इंडिया को बेचने की प्रॉसेस अगले साल से शुरू हो जाएगी,  क्योंकि नरेंद्र मोदी भी चाहते हैं कि उनके इस टेन्योर में यह प्रॉसेस पूरी हो जाए। अधिकारी ने कहा कि इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा। हालांकि अभी इस बात पर एकराय नहीं बन पाई है कि सरकार को कुछ हिस्सेदारी अपने पास रखनी चाहिए या फिर उसे पूरी तरह बेच दिया जाना चाहिए।  साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि खरीदार सिर्फ फायदे की चीजें ले लें और सरकार के पास सिर्फ लाभहीन हिस्से बच जाएं। पिछले महीने ही मोदी की अगुआई वाली कैबिनेट ने एअर इंडिया के डिसइन्वेस्टमेंट को मंजूरी दी थी। पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने एअर इंडिया में अरबों डॉलर रुपए का इन्वेस्टमेंट किया था।

एयरलाइन्स की खरीद की दौड़ सबसे आगे टाटा ग्रुप

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई में पांच सीनियर मिनिस्टर्स की एक कमेटी इस महीने के आखिरी से एअर इंडिया के बेचने के प्लान पर काम करना शुरू करेगी।  एअर इंडिया की खरीद में टाटाए इंडिगो और स्पाइसजेट दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इन ग्रुप्स ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसी के तहत रतन टाटा ने हाल ही में पीएम और एविएशन मिनिस्टर से मुलाकात भी की है। 

बेलआउट पैकेज  30 हजार करोड़ का 

1930 में शुरू की गई एअर इंडिया की फाइनेंशियल कंडीशन 2007 से ही खराब है और उसका घाटा लगातार बढ़ रहा है।   हालांकि, 2012 में उस वक्त की यूपीए सरकार ने एअर इंडिया को 30 हजार करोड़ का बेलआउट पैकेज भी दिया। इसके बावजूद कंपनी की खराब खराब फाइनेंशियल कंडीशन पर काबू नहीं पाया जा सका। फिलहाल इस एअरलाइन पर करीब 55 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। 

सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइन

गवर्नमेंट सेक्टर की एअरइंडिया देश की सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइन कंपनी है। यह 41 इंटरनेशनल और 72 घरेलू डेस्टिनेशंस के लिए उड़ान मुहैया कराती है।  मार्केट के लिहाज से बात करें तो 17ः हिस्सेदारी के साथ यह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी है।  यही नहीं घरेलू पैसेंजर मार्केट में भी कंपनी की हिस्सेदारी 14ण्6ः है। हालांकि, निजी कंपनियों के तेजी से विस्तार के चलते एअर इंडिया की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट आ रही है। 

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